हमारी सालगिरह की एक छोटी-सी याद
Nisha,तुम्हारे साथ एक और साल, जिसे मैं फिर से जीना चाहूँगा।
निशा, सालगिरह के लिए कोई एक प्यारी याद चुन रहा था। बार-बार वही शाम याद आई, जब बिजली चली गई थी, हमारे पास दो कप चाय थी और बातें ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही थीं।
तुम्हारे लिए कुछ और भी है↓छोटी-छोटी बातें
जो दिल में रहती हैं।
कुछ बातें, खास तुम्हारे लिए। एक नोट खोलो, आराम से पढ़ो।
01जब बिजली चली गई थीएक छोटी-सी बात
हम चाय लेकर बालकनी में बैठ गए थे। हमारी बातें ख़त्म होने से पहले ही बिजली आ गई, पर उस वक़्त वहीं बैठे रहना कितना अच्छा लग रहा था।
02एक-दूसरे के लिए निकाला हुआ वक़्तएक छोटी-सी बात
उस शाम कोई ख़ास दिन नहीं था। फिर भी तुम मेरे पास आकर बैठीं और हमने इतनी देर बातें कीं। हमारे साथ में मुझे यह बात बहुत प्यारी लगती है।
वह शाम जो अक्सर याद आती है
दुनिया थोड़ी देर ठहर सकती है। यह पल तुम्हारा है।
मुहर छुओ। दिल की एक छोटी-सी बात खोलो।
आने वाली उन सारी शामों के नाम
उम्मीद है कि व्यस्त दिनों के बीच भी हम एक-दूसरे के लिए थोड़ा वक़्त निकालते रहें। और कभी बातों में चाय ठंडी हो जाए, तो उसे वहीं रहने दें।
सालगिरह मुबारक, निशा। तुम्हारे साथ ये दिन बिताकर मैं बहुत खुश हूँ।
Deepak
यह छोटा-सा संसार तुम्हारा है। जब मन करे, लौट आना।